Rahul...

08 December 2010

..सिर्फ इतना देना

जन्नत में हूँ मै
तुम रखना अपने साये में..
 कि.... हर पल.. हर दिन..
यह तस्वीर बने..
जन्नत में हूँ मै
तुम रखना
हमेशा अपनी गोद में
जहाँ.. है मीठी नींद..
खूब सारी तितलियाँ..
सुनहरे बुलबुले
माँ..
मुझे यहीं रहने देना  ...
सिर्फ इतना देना
कि.
यही जन्नत..
हर जन्म में नसीब हो
                                     राहुल

4 comments:

  1. ब्लाग जगत की दुनिया में आपका स्वागत है। आप बहुत ही अच्छा लिख रहे है। इसी तरह लिखते रहिए और अपने ब्लॉग को आसमान की उचाईयों तक पहुंचाईये मेरी यही शुभकामनाएं है आपके साथ
    ‘‘ आदत यही बनानी है ज्यादा से ज्यादा(ब्लागों) लोगों तक ट्प्पिणीया अपनी पहुचानी है।’’
    हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

    मालीगांव
    साया
    लक्ष्य

    हमारे नये एगरीकेटर में आप अपने ब्लाग् को नीचे के लिंको द्वारा जोड़ सकते है।
    अपने ब्लाग् पर लोगों लगाये यहां से
    अपने ब्लाग् को जोड़े यहां से

    कृपया अपने ब्लॉग पर से वर्ड वैरिफ़िकेशन हटा देवे इससे टिप्पणी करने में दिक्कत और परेशानी होती है।

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  2. बेहद मनमोहक काव्य रचना......ह्रदय को स्पर्श करती..... मेरा ब्लागःः"काव्य कल्पना" आप आये और मेरा मार्गदर्शन करे...धन्यवाद.....

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  3. अच्छी पोस्ट , शुभकामनाएं ।

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  4. हिन्दी ब्लाग-जगत में आपके नव-आगमन का स्वागत है, उम्मीद है आप शीघ्र ही सफलता के नये सोपानों का स्पर्श करते हुए अपने इस ब्लाग को सफलता के उच्च शिखर पर स्थापित कर सकेंगे । शुभकामनाओं सहित...
    इन्सानियत की श्रेष्ठतम मिसाल- देखिये लघु संस्मरण "प्रेरक प्रसंग- दरियादिली"
    www.najariya.blogspot.com 'नजरिया'
    और हाँ यदि आपको ये ब्लाग पसन्द आवे तो कृपया समर्थक सूचि में शामिल होकर इसे अपना समर्थन अवश्य प्रदान करें । यकीनन तब आप एक समर्थक अपने ब्लाग पर भी बढा लेंगे. धन्यवाद.

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